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जीवन का सार--शून्य से विभाजन

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प्राकृतिक विज्ञान की मौलिक अवधारणा, जिसमें प्रकृति अपनी प्राकृतिक अवस्था में खुद को कैसे बनाए रखती है और इस ग्रह पर रहने वाली सभी प्रजातियों का पर्यावरण के साथ अंतर सम्बन्ध पर विचार करता हैं। प्रथम अध्याय प्रकृति के विज्ञान की व्याख्या करता है कि प्राकृतिक मानव-प्रकृति नेटवर्किंग कैसे काम करती है, और कैसे यह रिश्ता चक्र प्रणाली के अनुसार स्थायी है और हमेशा आगे बढ़ता रहता है । जैसे भौतिक विज्ञान में ऊर्जा और पदार्थ के बीच संबंध होता है, प्रकृति और प्रजातियों के बीच भी संबंध होता है। प्राकृतिक संसाधन वितरण दूसरे अध्याय का फोकस है, जो दर्शाता है कि कैसे प्रकृति अपने सभी संसाधनों को पूरे ग्रह पर वितरित करती है और शून्य से विभाजित नियम...

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